जब तुम उदास होती हो*
जब तुम उदास होती हो*
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जब तुम उदास होती हो--
भला नहीं लगता मुझे
पूरब का सूरज
चिडि़यों का कलरव,धूप का स्वरुप
भाता नहीं मुझे भोर का कोई रुप।
जब तुम उदास होती हो--
भली नहीं लगती मुझे
शिवालय की घंटियाँ
भैरव की तान,रंभाती गाय
भाती नहीं मुझे कुल्हड़ की चाय।
जब तुम उदास होती हो--
भला नहीं लगता मुझे
बिलखते शिशु का शोर,
मेरी गोद में चढ़ना,लुका-छुपी खेलना
भाता नहीं मुझे मुंडेर पर गौरये का आना।
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(तारक नाथ चौधुरी)
से.नि.शिक्षक
बी.एम.वाय.चरोदा.

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